सुप्रीम कोर्ट की नई शर्तों से TTZ में उद्योगों की राह आसान नहीं:
आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में उद्योग लगाने और पुराने उद्योगों के विस्तार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भले ही लंबित आवेदनों पर विचार की अनुमति दे दी है, लेकिन नई शर्तों ने उद्योगों और विकास कार्यों के सामने नई मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं। कारोबारियों का मानना है कि अब मंजूरी की प्रक्रिया पहले से अधिक लंबी और जटिल हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब TTZ अथॉरिटी की हर बैठक में NEERI और CEC के विशेषज्ञों की मौजूदगी जरूरी होगी। अगर दोनों में से किसी एक विशेषज्ञ ने किसी उद्योग पर आपत्ति जता दी तो उस आवेदन पर फैसला नहीं हो सकेगा। ऐसे मामलों में फिर सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ेगी। इससे नए उद्योग और विस्तार की योजनाएं अटक सकती हैं।
अदालत ने यह भी कहा है कि TTZ अथॉरिटी जिन उद्योगों को मंजूरी देगी, उनकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। ऐसे में पर्यावरण से जुड़े संगठन या अन्य लोग आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इससे मंजूरी मिलने के बाद भी उद्योगों को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
नई व्यवस्था में हर प्रस्ताव की पूरी रिपोर्ट पहले से NEERI और CEC के विशेषज्ञों को भेजनी होगी। यदि किसी बैठक में दोनों विशेषज्ञ मौजूद नहीं हुए तो बैठक ही नहीं हो सकेगी। ऐसे में करीब 410 लंबित आवेदनों के निस्तारण में और समय लगने की आशंका है।
सड़क और अन्य विकास परियोजनाओं को भी फिलहाल राहत नहीं मिली है। आगरा-भरतपुर हाईवे के ब्लैक स्पॉट सुधारने के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई और पीडब्ल्यूडी की सड़क परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी फैसला नहीं दिया है। इन मामलों में पहले CEC की रिपोर्ट आने का इंतजार होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है। गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की अंतिम परिभाषा, TTZ का विजन डॉक्यूमेंट और फिरोजाबाद की पर्यावरण अध्ययन रिपोर्ट अभी आना बाकी है। जब तक इन पर अंतिम फैसला नहीं होता, तब तक उद्योगों और निवेशकों के सामने अनिश्चितता बनी रह सकती है।
