मास्टर प्लान के विपरीत निर्माण पर कंपाउंडिंग नहीं, समय बीतने से भी अवैधता खत्म नहीं होगी
आगरा। मेरठ के अवैध निर्माण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई 2026 के आदेश ने आगरा में भी अवैध निर्माणों की कंपाउंडिंग को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मास्टर प्लान में निर्धारित भू-उपयोग के अनुरूप नहीं होने वाले अवैध निर्माण की कंपाउंडिंग नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने इससे भी आगे साफ किया कि सिर्फ समय बीत जाने या अधिकारियों की ढिलाई से कोई अवैध निर्माण वैध नहीं हो जाता और न ही वह कंपाउंडिंग योग्य बन जाता है। अदालत ने कंपाउंडिंग की इस सोच को ही कड़ी आपत्ति के साथ खारिज किया।
ऐसे में आगरा में आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिकार क्षेत्र में आने वाले उन निर्माणों को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है, जिनमें स्वीकृत भू-उपयोग, मास्टर प्लान या निर्धारित मानकों से गंभीर विचलन है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को पूरे उत्तर प्रदेश में हर प्रकार की कंपाउंडिंग पर blanket रोक कहना सही नहीं होगा। लेकिन मेरठ मामले में अदालत द्वारा दिया गया स्पष्ट कानूनी संदेश यह है कि अवैधता को समय, लापरवाही या महज कंपाउंडिंग के रास्ते वैधता का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आगरा में ADA और आवास विकास परिषद ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की भावना और लागू नियमों के अनुरूप क्या रुख अपनाते हैं।
