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धर्म परिवर्तन कर शादी का दावा:: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो सगी बहनों को 6 अगस्त को किया तलब

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर विवाह का दावा करने वाली दो सगी बहनों को 6 अगस्त को तलब किया

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा की दो वयस्क सगी बहनों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें 6 अगस्त को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों बहनों ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार किया और अपनी पसंद के व्यक्तियों से विवाह करने का निर्णय लिया, जिसके बाद उनके पिता ने उन्हें अवैध रूप से अपने कब्जे में रखा है।

न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने कहा कि यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो महिलाओं के धर्म, विवाह और निवास संबंधी निर्णयों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उनके गरिमा, निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निर्णय लेने की स्वायत्तता जैसे संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन होगा।

याचिका दिव्या भाटिया उर्फ जोया दिया भाटिया (20 वर्ष) और अंशु भाटिया उर्फ अमीना अंशु भाटिया (35 वर्ष) की ओर से दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि दोनों वयस्क और स्वस्थ मस्तिष्क की हैं तथा उन्होंने बिना किसी दबाव, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार किया और अपनी पसंद के अनुसार विवाह करने का निर्णय लिया।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिता ने उनके धर्म परिवर्तन और विवाह के निर्णय का विरोध करते हुए उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई तथा स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से उन्हें अवैध रूप से बंदी बना लिया।

महिलाओं की ओर से अधिवक्ता अली बिन सैफ और कैफ़ हसन ने न्यायालय में दलील दी कि धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वैच्छिक था और इस मामले में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 लागू नहीं होता।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि दोनों महिलाएं वयस्क हैं और अपने धर्म, विवाह, निवास तथा जीवन से जुड़े निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि दोनों ने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया और अपनी पसंद से विवाह करने की इच्छा व्यक्त की है।

पीठ ने कहा कि इस स्तर पर न्यायालय का पहला दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि दोनों महिलाएं वास्तव में अपनी स्वतंत्र इच्छा से निर्णय ले रही हैं या किसी प्रकार की अवैध हिरासत में हैं। इसी उद्देश्य से उन्हें 6 अगस्त को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों और महिलाओं के पिता को उनकी न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित तिथि पर दोनों महिलाओं को पेश नहीं किया जाता, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर यह बताना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हो सका और उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत कराने के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए।

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